देश की हालत यह है की दिल्ली के जंतर मंतर पर कभी meitei समुदाय के छात्रों तो कभी kuki समुदाय के छात्रों का धरना प्रदर्शन होने लग जाता हे Manipur अभी भी क्यों चल रहा है?
आखिर किस लिए ताकि दिल्ली सुन ले और दिल्ली से चलने वाला मीडिया देश को दिखा दे कि क्या चल रहा है ?
लगातार 3 दिनों से कुकी समुदाय के लोग जंतर मंतर पर धरना दे रहे हैं
कुकी समुदाय के साथ जो हिंसा हुई है उसका हाल बताने के लिए जमा हुए है मगर अभी तक कोई मंत्री यहां हाल पूछने नहीं पहुंचा हैजबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह शान से बताते रहे हैं कि पूर्वोत्तर से 5 5 मंत्री उनके मंडल में है
कहीं ऐसा तो नहीं कि आप भी चुनाव की रैलियों को नीति समझने लगे हो रैली करना अलग बात है वहां के लोगों से मिलकर उनके बारे में जानना उनकी समस्याओं को सुनकर उसका समाधान निकालना अलग बात है हर भाषण में विकास तो चालाआ रहा है मगर मणिपुर में जब से हिंसा हुई तो भाषण ही गायब हो गए मणिपुर और पूर्वोत्तर की घटनाएं प्रधानमंत्री की राजनीति मजबूत निर्णय की कमजोरियों को उजागर कर रही है
गोदी मीडिया के चुप हो जाने में यह मुद्दा साफ नजर आ रहा है
एक महीना बाद के दौरे के बाद भारत सरकार राज्य के राज्यपाल की अध्यक्षता मैं शांति समिति का गठन कर रही है
जो काम घटना के पहले दिन से होना चाहिए था उस बारे में सरकार अब निर्णय ले रही है
जंतर मंतर पर meitei समाज की एक छात्रा का बयान सामने आया है जिसमें उसने यह कहा है कि यह सही नहीं है की 6 साल से शांति थी ऊपर से दिखावा हो रहा था मगर तनाव भीतर भीतर असर रहा था
आपको बता दें कि manipur में 3 मई से हिंसा हो रही है 6 दिन बाद ही यानी 9 मई को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कह दिया की हालात संभल रहे हे जब तक 60 लोगों मारे जा चुके थे उसके बाद भी हिंसा जारी रही अमित शाह के दौरे के एक दिन पहले तक हिंसा लगातार जारी रही बल्कि उनके दौरे के दौरान गोलीबारी जैसी खबरें आती रही इतना तो समझ ही सकते हैं आप के हालात जब सामान्य नहीं थे तब भी सामान्य होने के दावे किए जा रहे थे
Manipur की हिंसा का आलम यह है कि गृहमंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री को अपील करनी पड़ रही है की शस्त्रागार से जो हथियार लूटे गए हैं उन्हें वापस कर दीजिए
वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सिंह ने ट्वीट कर बताया था कि 1 महीने के भीतर2000 se 2400 weapons लूट लिए यह और सरकार ऐसा दिखा रही है कि कुछ हुआ ही नहींहै इमेजिन कीजिए की इस का दसवां हिस्सा भीकश्मीर या पंजाब में हुआ होता तो सरकार की क्या प्रक्रिया हुई होती
यह ट्वीट आप यहां पढ़ सकते हैं screen short

कितनी अराजक स्थिति रही होगी इससेआप अंदाजा लगा सकते हैं यह सब आपको नहीं दिखाया गया क्योंकि उसी वक्त इंटरनेट की सुविधा बंद कर दी गई 26 मई तक पूरी तरह से इंटरनेट बंद रहा
यह पहला मसला नहीं है जब पूर्वोत्तर बेकाबू हुआ है आपको याद दिला दे कैसे 2019 में नागरिकता कानून को लेकर ऐसा तनाव पैदा किया गया था ऐसे ऐसे बयान दिखाएं गए की अवैध तरीके से देश में घुस आए लोगों को आज ही बाहर निकाल दिया जाए और संसद में आज ही कानून बनाकर उन्हें बाहर निकालना हे कानून तो जैसे तैसे बन गया मगर लागू आज तक नहीं हो पाया क्योंकि नियम ही नहीं बने तो लागू कैसे हो जाए
source https://madhyapradeshsamachar.in/2023/06/02/why-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%a4-%e0%a4%af%e0%a4%b9-%e0%a4%b9%e0%a5%88/